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11 हजार हेक्टेयर से अधिक वन भूमि अतिक्रमण की चपेट में

– राज्य ने गठन के बाद गंवाई 50 हजार हेक्टेयर वन भूमि, धार्मिक स्थलों के नाम पर भी खूब हो रहा अतिक्रमण
PEN POINT, DEHRADUN : राज्य में 53483 वर्ग किमी में फैले वन क्षेत्र में से करीब 11 हजार हेक्टेयर से अधिक वन भूमि अतिक्रमण की चपेट में है। इन दिनों जब वन भूमि पर धार्मिंक स्थलों के निर्माण के नाम पर अवैध कब्जे की चर्चाओं का बाजार गर्म है तो वन विभाग ने खुलासा किया है कि राज्य में करीब 11784 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण की चपेट में है। वहीं, राज्य ने गठन के बाद विभिन्न विकास योजनाओं व निर्माण के लिए 50 हजार हेक्टेयर से अधिक वन भूमि गंवाई है।
इन दिनों वन भूमि पर अवैध कब्जा कर मजार निर्माण को लेकर खूब चर्चा है। लैंड जिहाद का नाम देकर राज्य में अवैध रूप से बनी मजारों को हटाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अभियान चलाने का भी एलान किया है। वन विभाग की ओर से भी पुष्टि की गई कि राज्य में वन भूमि पर धार्मिंक ढांचों के नाम पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण किया गया है। वन विभाग की ओर से वन भूमि पर बने 100 अवैध मजारों को हटाया गया है जबकि अभी भी एक हजार से अधिक अवैध तरीके से वन भूमि पर बने धार्मिक स्थलों को हटाने की तैयारियां भी वन विभाग कर रहा है। वन विभाग की माने तो धार्मिक स्थलों के नाम पर एक हजार से अधिक अवैध कब्जों को चिन्हित किया गया है। राज्य का करीब 70 फीसदी हिस्सा वनों से ढका है ऐसे में राज्य के गढ़वाल में 2294 हेक्टेयर और कुमाऊं मंडल में 9490 हेक्टेयर वन क्षेत्र अतिक्रमण की चपेट में है। इसके अलावा वन्य जीव विहार के 75 हेक्टेयर में अतिक्रमण है।
वहीं, एक ओर रिपोर्ट के मुताबिक राज्य गठन के बाद अब तक राज्य में करीब 50 हजार हेक्टेयर वन भूमि विभिन्न परियोजनाओं, निर्माण कार्यों की भेंट चढ़े हैं। अकेले खनन के लिए ही नौ हजार हेक्टेयर वन भूमि नष्ट की गई तो सड़क निर्माण के लिए साढ़े सात हजार हेक्टेयर वन भूमि खत्म की गई। वहीं, रेल परियोजनाओं, ऑल वेदर रोड, विद्युत परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर वन भूमि का अधिग्रहण किया गया।

 

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