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भ्रष्ट नेता : मनीष सिसौदिया से पहले यह प्रमुख चेहरे खा चुके हैं जेल की हवा

PEN POINT, DEHRADUN :  दिल्ली के उपमुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री मनीष सिसौदिया को सीबीआई ने शराब घोटाले में रविवार को जेल भेज दिया। उन्हें दिल्ली में हुए शराब घोटाले का प्रमुख आरोपी बनाया गया है। दिल्ली सरकार के मंत्री सत्यैंद्र जैन पहले ही भ्रष्टाचार के आरोप में तिहाड़ जेल में बंद है। वहीं, आप प्रमुख व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के राइट हैंड माने जाने वाले और आम आदमी पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले मनीष सिसौदिया को जेल भेजने के मुद्दे पर दिल्ली आम आदमी पार्टी सरकार ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
भारतीय राजनीति में आजादी के बाद से ही भ्रष्टाचार के आरोप में बड़े नेताआें के जेल जाने का न तो यह पहला मामला है और न ही शायद आखिरी होगा।
आईए जानते हैं भारतीय राजनीति के वह प्रमुख चेहरे जो भ्रष्टाचार की वजह से जेल गए

'Pen Point
मनीष सिसौदिया – दिल्ली के उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसौदिया पर आरोप है कि उन्होंने शराब टैंडर में अनियमितताएं कर दिल्ली सरकार को 34 करोड़ रूपये से अधिक का नुकसान पहुंचाया। आबाकारी नीति में चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए रिश्वत लेने के आरोप में सीबीआई ने उन्हें रविवार को जेल भेजा।

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सत्यैंद्र जैन : दिल्ली आप सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्यैंद्र जैन को बीते साल ईडी ने हवाला के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वह पिछले 10 महीनों से तिहाड़ जेल में बंद हैं।
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पी चिदंबरम – यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम को 2019 में सीबीआई ने उन्हें आईएनएक्स मीडिया मामले में गिरफ्तार किया  जेल भेज दिया। 2007 उनके वित्त मंत्री रहते एक मीडिया समूह को विदेशी कोष हासिल करने के लिये एफआईपीबी की मंजूरी देने में अनियमितता बरते जाने का आरोप लगा था।
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लालू प्रसाद यादव – बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रेल मंत्री लालू 900 करोड़ों रुपये से अधिक के चारा घोटाले में दोषी ठहराये जाने के बाद रांची जेल में बंद थे जहां से वह उपचार के लिए सिंगापुर गये और हाल ही में किडनी के सफल प्रत्यारोपण के बाद वापिस लौटे हैं। 14 वर्ष की सजा पाए लालू प्रसाद यादव फिलहाल जमानत पर बाहर है।

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जे जयललिता – तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री स्व. जयललिता को 1996 में जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर मामले में गिरफ्तार किया गया था। जयललिता पर आरोप था कि उन्होंने 1991 से 1996 के बीच तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहते 66.65 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की, जो उनके आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक थी।
जयललिता और उनकी करीबी शशिकला समेत तीन लोगों को आय से अधिक संपत्ति मामले में सितंबर 2014 में दोषी ठहराया गया। उन्हें चार साल की जेल और 100 करोड़ रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई, हालांकि जललिता 21 दिन बेंगलोर केन्द्रीय कारागार में काटने के बाद अक्टूबर 2014 में चेन्नई लौट आईं। दिसंबर 2016 में लंबी बीमारी के बाद 68 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
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बंगारु लक्ष्मण – भाजपा के पूर्व अध्यक्ष बंगारु लक्ष्मण को दिल्ली की एक अदालत ने 2012 में फर्जी हथियार सौदा मामले में एक लाख रुपये की घूस लेने के लिये चार साल कैद की सजा सुनाई थी। तहलका मैगजीन द्वारा किए गए स्टिंग कांड में उन्होंने रक्षा हथियार सौदों के लिए घूस लेने के साथ ही देश में दंगे करवाने के लिए भी रकम ली थी। वह 2000 से 2001 के बीच भाजपा अध्यक्ष रहे। 2014 में उनका निधन हो गया।

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ए राजा – यूपीए सरकार पर सबसे बड़ा दाग रहा टू जी घोटाले में पूर्व दूरसंचार मंत्री और द्रमुक नेता ए राजा को दो फरवरी 2011 को गिरफ्तार किया गया था। 15 महीने दिल्ली की तिहाड़ जेल में काटने के बाद वह 12 मई 2012 को जमानत पर जेल से बाहर आ गए थे। विशेष अदालत ने 2017 में उन्हें दोष मुक्त कर दिया था। राजा तत्कालीन कांग्रेस नीत संप्रग सरकार में दूरसंचार मंत्री थे जब 2008 में आठ कंपनियों को ’पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर 122 दूरसंचार स्पेक्ट्रम लाइसेंस आवंटित किये गए थे। राजा को विशेष अदालत ने 2017 में बरी कर दिया था।

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कनिमोझी- द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि की बेटी कनिमोझी को 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में 21 मई, 2011 से 28 नवंबर, 2011 तक छह महीने जेल में रहीं। उन्हें भी 2017 में बरी कर दिया गया।

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सुरेश कलमाड़ी
दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भारी गड़बड़ी के आरोप में 25 अप्रैल, साल 2011 में सीबीआई ने सुरेश कलमाड़ी को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद वह देश की सबसे बड़ी जेल में भी गए। कलमाड़ी को खेल से संबंधित पुरस्कारों में धोखाधड़ी, षड्यंत्र और भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली के जेल में 9 महीने बिताने के बाद कलमाड़ी को 2012 की शुरुआत में तिहाड़ भेज दिया गया।

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बीएस येदियुरप्पा – किसी भी दक्षिण भारतीय राज्य में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बनने वाले बी एस येदियुरप्पा को सरकारी भूमि को निरूपित करने में कथित अनियमितताओं के लिये अक्टूबर 2011 में गिरफ्तार किया गया। 2011 में ही 25 दिन जेल में रहने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

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अमर सिंह – समाजवादी पार्टी के पूर्व कद्दावर नेता और राज्यसभा सदस्य अमर सिंह को 2008 के सनसनीखेज नोट के बदले वोट मामले में कथित भूमिका के लिये 2011 में 12 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। बाद में उन्हें उच्चतम न्यायालय ने राहत दी थी। अमर सिंह का 1 अगस्त 2020 को लंबी बीमारी के बाद सिंगापुर में निधन हो गया था।

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ओम प्रकाश चौटाला : दिल्ली की एक अदालत ने जनवरी 2013 में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे समेत 53 लोगों को तीन हज़ार अध्यापकों को ग़ैर क़ानूनी रूप से भर्ती करने का दोषी क़रार दिया था। चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को 10-10 साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई। आरोप है कि 1999-2000 के दौरान हरियाणा में 3,032 लोगों को अध्यापक के तौर पर भर्ती किया गया था। आरोप था कि इनमें से हर एक से तीन से चार लाख रुपये की रिश्वत ली गई थी।

 

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जगन्नाथ मिश्रा – जगन्नाथ मिश्रा बिहार के आखिरी कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे। उनके चुनाव में हारने के बाद कांग्रेस कभी बिहार में सत्ता में वापसी नहीं कर पाई। जगन्नाथ मिश्रा को भी चारा घोटाले के सिलसिले में जेल जाना पड़ा। वे भी चाइबासा कोषागार से 37.7 करोड़ रुपए निकालने के मामले में दोषी पाए गए। उन्हें इस मामले में अभियुक्त तब बनाया गया था जब वे विधानसभा में विपक्ष के नेता थे।

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रशीद मसूद – कांग्रेस सांसद रशीद मसूद को सीबीआई की विशेष अदालत ने एमबीबीएस सीट आवंटन मामले में चार साल जेल की सज़ा सुनाई।मसूद साल 1990 और 1991 के बीच केंद्रीय स्वास्थ राज्य मंत्री थे। केंद्रीय पूल से देश भर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए त्रिपुरा को आवंटित एमबीबीएस सीटों पर धोखाधड़ी से अयोग्य उम्मीदवारों को नामित करने के मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया। मसूद पहले समाजवादी पार्टी में थे लेकिन 2012 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे।

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सुखराम : पूर्व संचार मंत्री सुखराम को वर्ष 1996 में एक कंपनी को ठेका देने के बदले तीन लाख रूपए की घूस लने के आरोप में तीन साल की सज़ा मिली। हालांकि बाद में उन्हें ज़मानत मिल गई और उनकी ज़मानत अवधि को सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ा दिया था। सुखराम नरसिंह राव सरकार में संचार मंत्री रहे। 11 मई 2022 को उनका निधन हो गया।

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